श्री निधिवनराज की जै रहियै

Lalit Kishori Vani — श्री ललित किशोरी देव

Verse 32 of 35

(राग गौरी) श्री निधिवनराज की जै रहियै। जामें नित्य बिहार निरंतर काम कहानी कहियै॥ [1] श्रीहरिदास सहायक अँग सँग और कहा हमें चहियै। श्रीकुंजबिहारिनि प्रान पियारी उमँगि उमँगि दुलरैये॥ [2] - श्री ललितकिशोरी देव जू, श्री ललितकिशोरी देव जू की वाणी, सिद्धांत के पद (40) (राग गौरी) जय श्री निधिवनराज. नित्य बिहार जाकर कथा सुनाओ।।[1] श्री हरिदास ने सहायक शरीर सहित कहा, हमें इसकी आवश्यकता है। श्री कुंजबिहारिणी प्राण प्यारी उमंगी उमंगी दुलारीये.. [2] - श्री ललित किशोरी देव जू, श्री ललित किशोरी देव जू के वचन, सिद्धांत (40)
श्री निधिवनराज की जै रहियैहमारे महल कौ नातौ साँचौ