हमारे महल कौ नातौ साँचौ

Lalit Kishori Vani — श्री ललित किशोरी देव

Verse 33 of 35

हमारे महल कौ नातौ साँचौ। [1] याही के बल गरजत सब सों आवै नाहीं आँचौ॥ [2] कुंजबिहारी ललित लाडिली इनही हिय में खाँचौ। [3] श्रीहरिदासी रसिक सिरोमनि मन मिलि पोषत पाँचौ॥ [4] - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की बानी, सिद्धांत के पद (58) हमारा महल कहाँ है? [1] याही के बल पर सभी पुत्र दहाड़ते नहीं आते.. [2] कुंजबिहारी ललित लाडिली इन्हि पुरुष खांचौ। [3] श्री हरिदासी रसिक सिरोमनि मन मिलि पोषत पंचौ.. [4] - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की बानी, सिद्धांत के पद (58)
श्री निधिवनराज की जै रहियैहमारे महल कौ नातौ साँचौ