परसाद विहारिनि रानी कौ
Lalit Kishori Vani — श्री ललित किशोरी देव
Verse 8 of 35
जय श्री हरिदासी राधे जू। [1]
महा प्रेम भरि अति सुखरासी अद्भुत रूप अगाधे जू॥ [2]
परम कृपाल उदार रसिक वर हरत लाल की बाधे जू। [3]
श्री कुंजबिहारिनि ललित किसोरी, पुरई मन की साधे जू॥ [4]
- श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धांत के पद (84)
जय श्री हरिदासी राधे जू। [1] महान प्रेम, महान सुख, अद्भुत रूप, महान सौंदर्य.. [2] परम दयालु, उदार, स्नेही वर हरत लाल की महान सुंदरता। [3] श्री कुंजबिहारिणी ललित किशोरी, पुरा मन की साधे जू.. [4] - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू के वचन, सिद्धांत (84)