यह आनंद कहौ न परे री
Lalit Mohini Vani — श्री ललित मोहिनी देव
Verse 32 of 32
यह आनंद कहौ न परे री ।
श्री ललित मोहिनी यह सुख विलसत देखती नैन सीरैं री॥
- श्री ललित मोहिनी देव, ललित मोहिनी देव जू की वाणी, रस के पद (48)
हां आनंद कहौ एन परे री। श्री ललित मोहिनी यः सुख विलासत देखती नैन सिरैन रे.. - श्री ललित मोहिनी देव, ललित मोहिनी देव जू की वाणी, रुचि के बोल (48)