श्री ललितमोहिनी देव जू की वाणी

Lalit Mohini Vani

श्री ललित मोहिनी देव · 32 verses · Braj

  1. 1. गुरु राखै फूटौ करवा लगावै रज
  2. 2. गुरु राखै फूटौ करवा लगावै रज
  3. 3. गुरु राखै फूटौ करवा लगावै रज
  4. 4. गुरु राखै फूटौ करवा लगावै रज
  5. 5. बिहारी तेरे नैंना रूप भरे
  6. 6. गुरु राखै फूटौ करवा लगावै रज
  7. 7. गुरु राखै फूटौ करवा लगावै रज
  8. 8. गुरु राखै फूटौ करवा लगावै रज
  9. 9. गुरु राखै फूटौ करवा लगावै रज
  10. 10. गुरु राखै फूटौ करवा लगावै रज
  11. 11. गुरु राखै फूटौ करवा लगावै रज
  12. 12. गुरु राखै फूटौ करवा लगावै रज
  13. 13. गुरु राखै फूटौ करवा लगावै रज
  14. 14. गुरु राखै फूटौ करवा लगावै रज
  15. 15. गुरु राखै फूटौ करवा लगावै रज
  16. 16. गुरु राखै फूटौ करवा लगावै रज
  17. 17. गुरु राखै फूटौ करवा लगावै रज
  18. 18. गुरु राखै फूटौ करवा लगावै रज
  19. 19. गुरु राखै फूटौ करवा लगावै रज
  20. 20. गुरु राखै फूटौ करवा लगावै रज
  21. 21. गुरु राखै फूटौ करवा लगावै रज
  22. 22. गुरु राखै फूटौ करवा लगावै रज
  23. 23. गुरु राखै फूटौ करवा लगावै रज
  24. 24. गुरु राखै फूटौ करवा लगावै रज
  25. 25. गुरु राखै फूटौ करवा लगावै रज
  26. 26. आजु बधाई श्रीवृन्दावन
  27. 27. जाहि वृन्दावन नहि भावे। सो यहाँ काहे कौं मूंड मुडावै॥
  28. 28. आजु बधाई श्रीवृन्दावन
  29. 29. मान न कीजै प्रान पियारी जू
  30. 30. मगन भये गुन गावैं। प्रिया चरन छिन छिन सहरावैं॥
  31. 31. श्री कुञ्ज बिहारी भजन कर, श्री कुञ्ज बिहारी देख।
  32. 32. यह आनंद कहौ न परे री