कसूंबी सारी पहरें सोधें सनी
Madhury Shata — श्री वंशी अलि
Verse 13 of 13
रूप की राशि किशोरी मोहिनी मन हरयौ है।
तीखी चितवन मुस्क्यान छबीली, टौना सौ कछु करयौ है॥ [1]
कुटिल अलक कल बिंदु चिबुक पर, प्रान गन लै धरयौ है।
नासा चढ़न बदन ऐडी की, अंग छैल छक भरयौ है॥ [2]
घूमत लाल हिलग सहचर गन, लखि घायल ह्वै परयौ है।
जै श्री बंसी अलि ललिता सर्वस्व सुखरास असन ही टरयौ है॥ [3]
- श्री वंशी अलि, माधुर्य शत (118)
रूप की राशि किशोरी मोहिनी, मन हरयौ है। तीखी चितवन मुस्कयम छबीली, तौना सौ कछु करयौ है..[1] टेढ़ा कलक, कल बिंदु चिबुक पार, प्रान गण ला धरयौ। नाक शरीर को ढकती है और एड़ियाँ ढकी होती हैं, शरीर के अंग त्वचा से ढके होते हैं... [2] घुम्मत लाल हिलग सहचर गण, लखि घायल है पराई। जय श्री बंसी अली ललिता, सर्व सुख असन ही तरयौ.. [3] - श्री बंसी अली, माधुरी शत (118)