कसूंबी सारी पहरें सोधें सनी

Madhury Shata — श्री वंशी अलि

Verse 12 of 13

राधे तेरे नैन कटारे। उत घायल घुमत ललितादिक इत ससक्त हैं कुँज बिहारी॥ [1] मुसिकन नौन डारी जिन हा हा निठुर हाथ तेरे जू कहारी। जय श्री वंशी मीन गहैं पावत ऐसौ न्याव जहाँरी॥ [2] - श्री वंशी अलि, माधुर्य शत (120) तेरी तो आँखे बंद थी राधे. वह घायल घुमत ललितादिक, यह शक्तिशाली कुंजबिहारी.. [1] मुसिकन नौ डारि जिन हा हा निठुर हाथ तेरे जू कहारी। जय श्री वंशी मिन गाहेन पावत ऐसौ न्याव जहाँरी.. [2] - श्री वंशी अली, माधुरी शत (120)
प्रीति की रीति रसिकनी जानैंकसूंबी सारी पहरें सोधें सनी