सुखकारी सबके सदा
Mahavani — श्री हरिव्यास देवाचार्य
Verse 11 of 65
मनमोहन बसकारिनी, नखसिख रूप रसाल।
सो स्वामिनि नित गाइये, रसिकनि राधा बाल॥
- श्री हरिव्यास देवाचार्य, महावाणी, उत्साह सुख (23)
मनमोहन बस्करिणी, नखसिख रूप रसाल। सो स्वामिनी नित गाती, रसिकनि राधा बल। - श्री हरिव्यास देवाचार्य, महावाणी, उत्साह एवं प्रसन्नता (23)