महावाणी
Mahavani
श्री हरिव्यास देवाचार्य · 65 verses · Braj
- 1. हम बालक तुम माय हमारी
- 2. सुखकारी सबके सदा
- 3. (दोहा)
- 4. सुखकारी सबके सदा
- 5. सुखकारी सबके सदा
- 6. सुखकारी सबके सदा
- 7. (दोहा)
- 8. जो कछु सो तुव चरन बल, नहिं मेरो उपकार।
- 9. सुखकारी सबके सदा
- 10. सुखकारी सबके सदा
- 11. सुखकारी सबके सदा
- 12. (दोहा)
- 13. मोरी अँखियाँ लगी रहौ नित और अभिलाष न चहौं ।
- 14. सुखकारी सबके सदा
- 15. (दोहा)
- 16. मोहि कृपा करि दीजिये, अंग संग की सेवा।
- 17. ॥ दोहा॥
- 18. बड़े भाग पाई जु हम, जीवन प्रान-अधारि।
- 19. (दोहा)
- 20. सुखकारी सबके सदा
- 21. सुखकारी सबके सदा
- 22. सुखकारी सबके सदा
- 23. सुखकारी सबके सदा
- 24. सुखकारी सबके सदा
- 25. सुखकारी सबके सदा
- 26. (दोहा)
- 27. (दोहा)
- 28. राधेजू मेरौ जनम सुधारौ।
- 29. (दोहा)
- 30. (दोहा)
- 31. जै जै आनन्द कन्दनी, श्रीहरिप्रिया किसोरि
- 32. सुखकारी सबके सदा
- 33. सुखकारी सबके सदा
- 34. अंग अंग सोभा जु पर, वारौं काम करोरि।
- 35. सुखकारी सबके सदा
- 36. बने दोउ रसिक बिहारी बिहारनी
- 37. सुखकारी सबके सदा
- 38. सुखकारी सबके सदा
- 39. (दोहा)
- 40. (दोहा)
- 41. सुखकारी सबके सदा
- 42. सुखकारी सबके सदा
- 43. सुखकारी सबके सदा
- 44. जय जय चतुरि चूड़ामनी
- 45. ॥ दोहा॥
- 46. (दोहा)
- 47. सुखकारी सबके सदा
- 48. सुखकारी सबके सदा
- 49. सुखकारी सबके सदा
- 50. सुखकारी सबके सदा
- 51. प्रान वारि बलिहारी लै, सुधि बुधि सकल विसारि।
- 52. सुखकारी सबके सदा
- 53. सुखकारी सबके सदा
- 54. यह रस दुर्लभ हूँ ते दुर्लभ, सुलभ नित्य रहत है ताहि।
- 55. अलबेले आँगन खरे, अंस अंस भुज धारि।
- 56. एक स्वरूप सदा द्वै नाम॥
- 57. राधा माधव भैंट भई
- 58. सुखकारी सबके सदा
- 59. जुगल किसोर किसोरी जोरी, गोरी श्याम तमाल।
- 60. कहि न परै सोभा या सुख की।
- 61. सुखकारी सबके सदा
- 62. मन मोहन मन मोहनी, सहज ही स्यामल गौर।
- 63. सुखकारी सबके सदा
- 64. सुखकारी सबके सदा
- 65. यही है यही है, भूलि भरमो न कोउ।