यही है यही है, भूलि भरमो न कोउ।

Mahavani — श्री हरिव्यास देवाचार्य

Verse 65 of 65

यही है यही है, भूलि भरमो न कोउ। भूलि भरमें तें, भव भटक मरिहौं॥ - श्री हरिव्यास देवाचार्य, महावानी, सिद्धान्त सुख (12) बस कोई गलती मत करना. क्या मैं भटक जाऊं और मर जाऊं... - श्री हरिव्यास देवाचार्य, महावाणी, सिद्धांत सुख (12)
सुखकारी सबके सदा