रसिक जननि कौ संग मनोहर
Man Shiksha — श्री किशोरी अलि
Verse 6 of 7
याही तैं, रसिकन की बानी, गहि तू तत्त्व छनी है।
को भटकै अब छाँड़ि किशोरी, अनत बिवाद धनी है॥
- श्री किशोरी अलि, मन शिक्षा (13)
यह वही रसिकाना बानी है, जहां आप शुद्ध तत्व हैं। अब छंदई किशोरी खो गई है, अंतहीन विवादों की धनी.. - श्री किशोरी अली, मन शिक्षा (13)