छाँड़ि नेह नंदलाल कौ हम नहिं चाहत जोग

Matiram Satsai — श्री मतिराम

Verse 1 of 10

अधम अजामिल आदि जे, हौं तिनकौ हौं राउ। मोहूँ पर कीजै दया, कान्ह दया दरियाउ॥ - श्री मतिराम, मतिराम सतसई (535) मैं तो अजामिल आदि के समान तुच्छ तिनका हूँ, रो रहा हूँ। मोहन पर दया कौन करे, दया क्यों करे.. - श्री मतिराम, मतिराम सतसई (535)
छाँड़ि नेह नंदलाल कौ हम नहिं चाहत जोग