छाँड़ि नेह नंदलाल कौ हम नहिं चाहत जोग
Matiram Satsai — श्री मतिराम
Verse 10 of 10
तेरी मुख-समता करी, साहस करि निरसंक।
धूरि परी अरबिंद मुख, चंदहि लग्यौ कलंक॥
- श्री मतिराम, मतिराम सतसई
आपका चेहरा समदर्शी है, आपका साहस निर्लिप्त है। मुख की धुरी पर अरविन्द, छंदहि लाग्यौ कलंक.. - श्री मतिराम, मतिराम सतसई