छाँड़ि नेह नंदलाल कौ हम नहिं चाहत जोग

Matiram Satsai — श्री मतिराम

Verse 9 of 10

सुबरन बेलि तमाल सौं, घन सौं दामिनी देह। तूँ राजति घनस्याम सौं, राधे सरिस सनेह॥ - श्री मतिराम, मतिराम सतसई (129) सुबरना बेलि तमाल सौं, घन सौं दामिनी देह। तू राजति घनस्याम सौं, राधे सरिस सनेह.. - श्री मतिराम, मतिराम सतसई (129)
छाँड़ि नेह नंदलाल कौ हम नहिं चाहत जोगछाँड़ि नेह नंदलाल कौ हम नहिं चाहत जोग