लुटेरिन लाड़िली लाल को लयो सर्वस रस लूटि

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Verse 1 of 6

लुटेरिन लाड़िली लाल को, लयो सर्वस रस लूटि। बाँधि कियो अपने बस कस करि, क्यों हू न पावत छूटि॥ - श्री हरिव्यस देवाचार्य, महावाणी, सुरत सुख (83) लुटेरिन लड़ैली लाल को, लियो सर्वस रस लुटी। अपने आप को कसकर बाँध लो, मैं पीछे क्यों न रहूँ? - श्री हरिव्यास देवाचार्य, महावाणी, सुरत सुख (83)
वृन्दावन कलानाथौ हृदयानन्द वर्द्धनौ