हाहा वृंदा विपिन रम्य अति

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Verse 3 of 6

हाहा वृंदा विपिन रम्य अति, सर्वोपरि रस धाम। दरशावौ काहू विधि छविनिधि, सुखनिधि श्यामा श्याम॥ - श्री प्रियादास जी, चाहवेली (32) हाहा वृंदा विपिन अति सुंदर, परम रस धाम। दर्शनौ कहु विधि छवि निधि, सुख निधि श्यामा श्याम.. - श्री प्रियादास जी, छविवेली (32)
वृन्दावन कलानाथौ हृदयानन्द वर्द्धनौश्री राधा सर्वेश्वरी रसिकेश्वर धनश्याम