मैं घनश्याम को देखता जा रहा हूँ
Mohan Mohini — श्री बिंदु जी
Verse 6 of 6
सदा श्याम-श्यामा पुकारा करेंगे।
नवल रूप निशि दिन निहारा करेंगे॥ [1]
यमुना तट लता कुञ्ज ब्रज बीथियों में।
विचर कर ये जीवन गुजारा करेंगे॥ [2]
मिलेगी जो रसिया की जूठन प्रसादी।
वही जीविका का सहारा करेंगे॥ [3]
बसेंगे करीलों में काँटों में हरदम।
जरात कंटकों से किनारा करेंगे॥ [4]
जो दृग ‘बिन्दु’ से पाँव धोया करेंगे।
तो पलकों से पथ को बुहारा करेंगे॥ [5]
- श्री बिंदु जी, मोहन मोहिनी
मैं सदैव श्यामा-श्यामा कहूँगा। इस दिन दिखेगा नवल रूप.. [1] यमुना तट लता कुंज ब्रज बिठिओं पुरुष। ये जिंदगी हम सोच समझकर बिताएंगे.. [2] रूस से जो भी जूठा खाना मिलेगा। केवल वे ही उनकी आजीविका का समर्थन करेंगे.. [3] कैरिलन हमेशा के लिए मेन कॉन्टन मेन में बस जाएंगे। जरत सवालों से दूर रहेंगे.. [4] 'बिंदु' के चरण कौन धोएगा. फिर पथ को पलकों से सींचेंगे.. [5] - श्री बिंदु जी, मोहन मोहिनी