मैं घनश्याम को देखता जा रहा हूँ

Mohan Mohini — श्री बिंदु जी

Verse 5 of 6

मेरी और मोहन की बातें, या मैं जानूँ या वो जाने। दिल की दुःख दर्द भरी बातें, या मैं जानूँ या वो जाने॥ [1] जब दिल में उनकी याद हुई, इक शक्ल नई ईज़ाद हुई। पल पल यह मस्त मुलाकातें, या मैं जानूँ या वो जाने॥ [2] नहीं जगता नहीं सोता हूँ, नहीं हँसता हूँ नहीं रोता हूँ। यह दर्दे जुदाई की रातें, या मैं जानूँ या वो जाने॥ [3] ग़म की घनघोर घटा गरजी, दामिनी वेदना की लरजी। दृग ‘बिन्दु’ भरी यह बरसातें, या मैं जानूँ या वो जाने॥ [4] - श्री बिंदु जी, मोहन मोहिनी मेरे और मोहन के बीच की बातचीत, या मुझे पता होना चाहिए या वह जेन। दिल की दुख-दर्द भरी बातें क्या मैं जानता हूं या वो जानता है... [1] जब दिल में उसकी याद आई, तो एक नया चेहरा बन गया। ये लम्हों की अद्भुत मुलाकातें हैं, या मैं जानता हूं या वह जेन है.. [2] न मैं जागता हूं, न सोता हूं, न हंसता हूं, न रोता हूं। या जुदाई की दर्दनाक रातें, या मैं जानता हूं या वह जेन है.. [3] दुख की गड़गड़ाहट, महिला दर्द की खुशी। द्रग 'बिंदु' तेज या बरसात, या मैं जानता हूं या वह जेन.. [4] - श्री बिंदु जी, मोहन मोहिनी
मैं घनश्याम को देखता जा रहा हूँमैं घनश्याम को देखता जा रहा हूँ