छबीले नील घन की पूतरी
Nanddas Granthavali — श्री नंददास
Verse 1 of 23
अब रहिहौं ब्रजभूमि की, ह्वै पगमारग धूरि।
विचरत पद मोपै परै, सब सुख जीवन मूरि॥
- श्री नंददास, श्री नंददास ग्रंथावली, भँवर गीत (66.2)
अब हम पथ की धुरी ब्रजभूमि में रहते हैं। विचारत पद मोपै पराई, जीवन का सारा सुख मर गया.. - श्री नंददास, श्री नंददास ग्रंथावली, भंवर गीत (66.2)