बेसर कौन की अति नीकी

Nanddas Granthavali — श्री नंददास

Verse 2 of 23

(राग अडानो व धनाश्री) बेसर कौन की अति नीकी। होड़परी प्रीतम अरु प्यारी अपने अपने जीकी॥ [1] न्याय पर्यो ललिता के आगे कौन सरस कौन फीकी। नन्द दास विलग जिन मानों कछु एक सरस लली की॥ [2] - श्री नंददास, श्री नंददास ग्रंथावली, पदावली (69) (राग अदाणो वे धनाश्री) बेसर कौन की अति निकी। होड़परी प्रीतम अरु प्यारी अपनी अपनी जैसी.. [1] न्याय परयो ललिता के उम्र कुछ सारस कुछ फ़िकी। सुस्वादु लाली कछुआ के लिए नंद दास विलाग जिन मनो.. [2] - श्री नंददास, श्री नंददास ग्रंथावली, पदावली (69)
छबीले नील घन की पूतरीछबीले नील घन की पूतरी