पिय प्यारी के चरण पलोटत

Nanddas Granthavali — श्री नंददास

Verse 15 of 23

(राग विहाग) पिय प्यारी के चरण पलोटत। [1] ललितादिक बिजना ले आईं ताही देखके घूँघट ओटत॥ [2] चन्दन लेप करत दोऊ अंगन आलिंगन अधरन रस घोटत। [3] नन्ददास श्याम श्यामा दोऊ पोढ़े नवनिकुंज कालिन्दी के तट॥ [4] - श्री नंददास, नंददास ग्रंथावली (राग विहागा) पिया पियारी के चरण फिरे। [1] ललितादिक बिजना ले ऐं ताहि देखा के घूंघट ओत्ता.. [2] युगल चंदन का तिलक लगाए गले मिले। [3] नंददास श्याम श्यामा दंपत्ति ने कालिंदी के तट पर नवनिकुंज बसाया.. [4] - श्री नंददास, नंददास ग्रंथावली।
श्रीवृषभान नृपति के आंगनपोढ़े श्याम श्यामा संग