श्रीवृषभान नृपति के आंगन

Nanddas Granthavali — श्री नंददास

Verse 14 of 23

(राग आसावरी) कृष्ण नाम जबतें श्रवण सुन्यो री आली भूली री भवन हों तो बावरी भई री॥ [1] भर भर आवें नयन चित हूं न परे चैन मुख हूं ना आवे बैन तन की दशा कछु औरें भई री॥ [2] जेतैक नेम धर्म कीनेरी मैं बहुविध अंग अंग भई हूं तो श्रवण मई री॥ [3] नंददास जाके श्रवनसुने यह गति माधुरी मूरति केन्धों कैसी दईरी॥ [4] - श्री नंददास, नंददास ग्रंथावली, पदावली (54) (राग आसावरी) कृष्ण नाम जाब्तेन श्रवण सुन्यो री अली भूली री भवन हो तो बावरी भाई री.. [1] भर भर आवें नयन चित हुन न पारे चैन मुख हुन न आवे बन तन की दशा कछू और भाई री.. [2] जेतक नाम धर्म किनेरी मैं बहुविद अंग अंग भाई हो तो श्रवण माई री.. [3] नंददास जेके श्रवण सुने ये गति माधुरी मुराती केंधों कैसी डायरी.. [4] - श्री नंददास, नंददास ग्रंथावली, पदावली (54)
देखों देखों री नागरनटपिय प्यारी के चरण पलोटत