पोढ़े श्याम श्यामा संग
Nanddas Granthavali — श्री नंददास
Verse 17 of 23
सब सुख-रासि लाडिली राधा।
जाके रस बस कुंजविहारी,
सुमिरत हरत जनम की बाधा॥ [1]
नित्यविहार कुंज वृंदावन,
ब्रजवासिन की पूरन साधा।
‘नंददास’ राधा मोहन भजि,
जोरी जुगल अनंग अगाधा॥ [2]
- श्री नंददास, नंददास ग्रंथावली
सारी खुशियाँ और उल्लास प्रिय राधा। जेके रस बस कुंजविहारी, सुमिरत हरत जनम की बद्दी। [1] नित्यविहार कुंज वृन्दावन, ब्रजवासिन पुराण साध। 'नंददास' राधा मोहन भाजी, जोरी जुगल अनंग अगाधा.. [2] - श्री नंददास, नंददास ग्रंथावली