रंग भरयौ लालन रंगीली प्यारी राधा

Naval Dev Vani — श्री नवल देव

Verse 1 of 2

(राग विहागरौ) रंग भरयौ लालन रंगीली प्यारी राधा। एक तन एक मन एक ही समान दोऊ, नेक हूँ न न्यारे ह्वै सकत पल आधा॥ [1] छबि सों छबीली भाँति नैनन में मुसकाति, मुसकन ही में रंग बढ़यौ है अगाधा। तैसीयै ‘नवल’ सखी तैसीयै कुंज बिहारी तैसी मेरी प्राण प्यारी पूजी मन साधा॥ [2] - श्री नवल देव जी, श्री नवलदेव जी की वाणी (7) (राग विहगरौ) रंग भरयौ लालन रंगीली प्यारी राधा। एक तन, एक मन, एक जोड़ी, मैं पवित्र हूं, मैं अकेला नहीं हूं, मैं हर पल में अकेला हूं.. [1] बेटे की छवि जैसी आंखों में मुस्कान, मुस्कुराहट ही इंसान का रंग है. तैसीयै 'नवाला' मित्र तैसीयै कुंज बिहारी तैसीयै, मेरे प्राण प्रिय, मन में सदा भजन गाओ.. [2] - श्री नवल देव जी, श्री नवलदेव जी की वाणी (7)
एक ही सिंगार तन एक प्राँन एक मन