भजनी क्यों डरिहै उपहासहि

Neh Nagaridas Vani — श्री नागरीदास

Verse 2 of 2

जिनके श्रीहरिवंश सहायक। तेई सजन भजन अधिकारी वृन्दावन घन बसिवे लायक॥ [1] अलक लड़े आनन्द भरे डोलें सिर पर व्याससुवन सुखदायक। कुंवरि कुंवर जाहि सुलभ नागरिदास रसिक शिरोमनि के गुनगायक॥ [2] - श्री नेह नागरी दास, श्री नेह नागरी दास जी की वाणी जिसके श्री हरिवंश उनके सहायक हैं। बंधे साजन भजन अधिकारी वृन्दावन घन बसिव लयक.. [1] अलक लड़े आनंद भीरे डोले, व्यास सुवन मस्तक सुखदायक। कुँवरि कुँवर जाहि सुलभ नागरीदास रसिक शिरोमणि की महिमा है.. [2] - श्री नेह नागरी दास जी के वचन श्री नेह नागरी दास जी
भजनी क्यों डरिहै उपहासहि