अंवर कंवर जौ जुरै रुखौउ उत्तम भोग
Nem Battisi — श्री हित दामोदर दास
Verse 2 of 13
अंवर कंवर जौ जुरै, रुखौउ उत्तम भोग।
वृन्दावन परि रहौ, दुख सुख कुछ संजोग॥
- श्री हित दामोदर दास, नेम बत्तीसी (19)
अनवर कंवर जौ फसल, रुखाऊ उत्तम भोग। वृन्दावन में रहो, कुछ सुख-दुख सम्हालो.. - श्री हित दामोदर दास, नाम बत्तीसी (19)