विहारिणि सर्वोपरि शिरताज
Nikunj Keli Madhuri — श्री अली माधुरी
Verse 34 of 34
विहारिणि सर्वोपरि शिरताज॥ टेक॥ [1]
रहत विहारी आज्ञाकारी, सहचरि संग समाज।
कुञ्ज निकुञ्जन रसमय पुञ्जन, सहज भरी सुखसाज॥ [2]
वन रजधानी रस सरसानी, अद्भुत अचल सुराज।
अलीमाधुरी कृपा दृष्टि से, पूरे तन मन काज॥ [3]
- श्री अली माधुरी जी, श्री निकुञ्ज केली माधुरी
विहारिणी सर्वोच्च नेता हैं.. टेक.. [1] राहत विहारी एक आज्ञाकारी, मिलनसार समाज हैं। कुंज निकुंजन रसमय पुण्यजन, सहज भारी सुखदायक।।[2] वनराजधानी रस सरसानि, अद्भुत अचल रवि। दयालु दृष्टि, पवित्र तन और मन वाली अली माधुरी.. [3] - श्री अली माधुरी जी, श्री निकुंज केली माधुरी