भुजा परस्पर अंश दे

Nikunj Keli Madhuri — श्री अली माधुरी

Verse 9 of 34

करुणा सागर लाड़िली, कृपा करौ अपनाय। बल बुद्धि कछु है नहीं, ना कोई चलत उपाय॥ - श्री अली माधुरी जी, श्री निकुंज केलि माधुरी, श्री राधा करुणावली (2) करुणा सागर लड़ैली, स्वीकार करो। न बल है, न बुद्धि है, न कोई कारगर उपाय है.. - श्री अली माधुरी जी, श्री निकुंज केली माधुरी, श्री राधा करुणावली (2)
भुजा परस्पर अंश देभुजा परस्पर अंश दे