भुजा परस्पर अंश दे

Nikunj Keli Madhuri — श्री अली माधुरी

Verse 10 of 34

कृपा करैं श्री हरि प्रिया, मिलै सार को सार। श्री राधा पद प्रीति रस, पावै नित्य विहार॥ - श्री अली माधुरी, श्री निकुंज केलि माधुरी, श्री राधा रस सिद्धांत (4) श्री हरि प्रिया कृपा करो श्री राधा पाद प्रीति रस, पावै नित्य विहार.. - श्री अली माधुरी, श्री निकुंज केली माधुरी, श्री राधा रस सिद्धांत (4)
भुजा परस्पर अंश देभुजा परस्पर अंश दे