श्यामा चरण कमल की आस

Nikunj Ras Vallari — हित गोपाल दास

Verse 96 of 108

श्यामा अब तो रह्यौ न जाय।पल-पल याद सताये तिहारी, सेवाकुञ्ज मन भाय॥ वृन्दाविपिन निकुञ्जन मांही, चरणन रज मिल जाय।श्रीगोपालहित प्राण जीवनी, भूले नहीं भुलाय॥ - हित गोपाल दास हे श्यामा (राधा), अब मैं तुम्हारे बिना एक क्षण भी नहीं रह सकता। आपकी स्मृति मुझे हर पल सताती रहती है और आपका नित्य स्थान सेवाकुंज मेरे हृदय को अत्यंत सुंदर लगता है. मेरी एकमात्र आशा यह है कि आप मुझे वृन्दावन के कुंजों में निवास दें और मैं आपके चरणों का रस प्राप्त कर सकूँ। हे श्री हित गोपाल दास जी की जीवनी! आपकी दयालुता और स्मृति को भूलकर भी नहीं भुलाया जा सकता। - हित गोपाल दास
श्री वृंदावनरज दरसावै सोईराधेजू मेरौ जनम सुधारौ।