निकुंज रस वल्लरी
Nikunj Ras Vallari
हित गोपाल दास · 108 verses · Braj
- 1. श्यामा चरण कमल की आस
- 2. श्यामा चरण कमल की आस
- 3. सुखकारी सबके सदा
- 4. श्यामा चरण कमल की आस
- 5. सुखकारी सबके सदा
- 6. जयति जयति वृषभानु दुलारी
- 7. श्यामा चरण कमल की आस
- 8. श्यामा चरण कमल की आस
- 9. श्यामा चरण कमल की आस
- 10. हमारी बृंदावन रजधानी
- 11. श्यामा चरण कमल की आस
- 12. श्यामा, सूझत नहीं कछु मोहे
- 13. राधा माधव भैंट भई
- 14. सुखकारी सबके सदा
- 15. किशोरी मोहे सोहनी देन सिखावो
- 16. राधे तुमको मेरी लाज
- 17. श्यामा चरण कमल की आस
- 18. राधे आन पड़ो तेरे द्वार
- 19. राधे आन पड़ो तेरे द्वार
- 20. जपौ मन राधा राधा नाम
- 21. श्यामा चरण कमल की आस
- 22. सुखकारी सबके सदा
- 23. (दोहा)
- 24. राधे कौन भयो अपराध हमारो
- 25. श्यामा अब तो रह्यौ न जाय
- 26. सुखकारी सबके सदा
- 27. रे मन श्रीवृन्दावन चल
- 28. राधा नाम को आधार
- 29. बने दोउ रसिक बिहारी बिहारनी
- 30. श्यामा चरण कमल की आस
- 31. रसमय धाम सृष्टि
- 32. वृन्दावन छाँड़ि कहूँ सुख नाहीं
- 33. राधा नाम जपौ दिन रैना
- 34. राधा नाम परम सुखदायी
- 35. मन श्री राधा-राधा कहि रे
- 36. हमारो धन राधा-राधा नाम
- 37. सुखकारी सबके सदा
- 38. सुखकारी सबके सदा
- 39. मन श्री राधा-राधा कहि रे
- 40. राधा-राधा जप तू मना रे
- 41. श्यामा चरण कमल की आस
- 42. श्यामा चरण कमल की आस
- 43. राधा नाम जपौ दिन रैना
- 44. नवल प्रिया कृपालू ऐसी
- 45. प्यारी कृपा लाल उर जानी
- 46. श्यामा, सूझत नहीं कछु मोहे
- 47. राधे अलबेली सरकार
- 48. वृन्दावन छाँड़ि कहूँ सुख नाहीं
- 49. सखी हों राधा चरण उपासी
- 50. हमारी सर्वस राधारानी
- 51. अब हम राधे चरण अली
- 52. श्रीराधा कृपा पै बलि जईये
- 53. श्यामा चरण कमल की आस
- 54. राधे तुमको मेरी लाज
- 55. राधा नाम सों चित रांच
- 56. कालीदह कूल कुंजके माहीं
- 57. श्यामा चरण कमल की आस
- 58. श्यामा चरण कमल की आस
- 59. अलबेले आँगन खरे, अंस अंस भुज धारि।
- 60. श्यामा चरण कमल की आस
- 61. कीवे कहा पढ़वे को कहा फल
- 62. बनाई बने तुम्हारी बात।
- 63. मन श्री राधा-राधा कहि रे
- 64. बिहारी जू है तुम लौ मेरी दौर
- 65. कीवे कहा पढ़वे को कहा फल
- 66. (कवित्त)
- 67. कीवे कहा पढ़वे को कहा फल
- 68. छबीली बिहारिनि की छबि पर बलिहारी
- 69. हे री ! मोहि लागत वृन्दावन प्यारो।
- 70. इन कुंजन विहरत नित ही नित।
- 71. कीवे कहा पढ़वे को कहा फल
- 72. सुखकारी सबके सदा
- 73. जुगल किसोर किसोरी जोरी, गोरी श्याम तमाल।
- 74. कीच लगी ब्रज खिरक की
- 75. नेक आगे आ श्याम तोपे रंग डारौं
- 76. कीवे कहा पढ़वे को कहा फल
- 77. कमल से कोमल ओ चीकने जू माखन ते,
- 78. देहु निकुंज निवास स्वामिनी
- 79. देहु निकुंज निवास स्वामिनी
- 80. राधे आन पड़ो तेरे द्वार
- 81. महाछवि राजें कोटि भानु लिखि लाजैं रूप
- 82. मन मोहन मन मोहनी, सहज ही स्यामल गौर।
- 83. श्यामा चरण कमल की आस
- 84. हमरी बात भली बनी भई लडैती प्रान
- 85. मोहि वास सदा वृन्दावन कौं, नित उठ यमुना पुलिन नहाऊँ। [1]
- 86. श्यामा चरण कमल की आस
- 87. कीवे कहा पढ़वे को कहा फल
- 88. सेवाकुंज सो कुँज निज, सम्पति दम्पति सेव।
- 89. प्रिया पिय छबि लखि छकनि छकाई
- 90. शरण श्री वृंदावन की जइये
- 91. श्री पौर्णमासी पूरी तरह से श्री राधा कृष्ण के लिए भोग की सबसे उत्तम व्
- 92. श्री श्यामानन्द प्रभु को इसी स्थान पर सोहनी सेवा करते समय श्री राधा रा
- 93. कीच लगी ब्रज खिरक की
- 94. कीच लगी ब्रज खिरक की
- 95. श्री वृंदावनरज दरसावै सोई
- 96. श्यामा चरण कमल की आस
- 97. राधेजू मेरौ जनम सुधारौ।
- 98. वारि डारौं विश्व सेवाकुंज के विहार पै
- 99. राधेजू मेरौ जनम सुधारौ।
- 100. श्यामा चरण कमल की आस
- 101. कीवे कहा पढ़वे को कहा फल
- 102. कीवे कहा पढ़वे को कहा फल
- 103. कीवे कहा पढ़वे को कहा फल
- 104. कीवे कहा पढ़वे को कहा फल
- 105. श्यामा चरण कमल की आस
- 106. कीवे कहा पढ़वे को कहा फल
- 107. श्रीराधामाधव रंगे सुरति रंग रस लीन
- 108. श्यामा चरण कमल की आस