प्रिया मैं तो हूँ चेरिन की चेरी
Padavali —
Verse 1 of 9
(राग कान्हरा एवं राग गौरी)
आज सखी बनी है अनोखी जोरी।
कालिन्दी के कूल मनोहर, विहरत निज रुचि सों री।
फूलन के बंगला में राजैं, मोहन राधा गोरी॥ [1]
फूल सिंगार सजे अंग अंगन, उपमा कहे कवि को री ?
'रूपमाधुरी' रूप निहारत, बंधी प्रेम की डोरी॥ [2]
- श्री रूपमाधुरी जी, श्री रूपमाधुरी जी की वाणी, पदावली (178)
(राग कान्हड़ा और राग गौरी) आज मेरे दोस्तों की एक अनोखी जोड़ी बन गई है. कालिंदी का परिवार आकर्षक है, विहार का बेटा स्वार्थी है। फूलन के बंगले में रजिन, मोहन, राधा गोरी.. [1] आंगन पूरा सजा है, कवि को उपमा क्यों पसंद है? 'रूपमाधुरी' ने रूप देखा, बांध लिया प्रेम का धागा.. [2] - श्री रूपमाधुरी जी, श्री रूपमाधुरी जी की वाणी, पदावली (178)