किशोरी दे वृन्दावन वास
Padavali —
Verse 5 of 9
(राग दरबारी कान्हरा)
किशोरी राखो शरण गहे की लाज।
मन नहीं लागत दरश बिन प्यारी,
रसिकन की सिरताज॥ [1]
नेक नज़र भर देखो मो दिशि,
जावे सब दुख भाज।
रूप माधुरी सरस स्वामिनी,
अरज सुनो यह आज॥ [2]
- श्री रूपमाधुरी जी, श्री रूपमाधुरी जी की वाणी, पदावली (120)
(राग दरबारी कान्हड़ा) जवान रहो, छिपना शर्म की बात है। प्रियतम के बिना प्रियतम का ताज देखने का मन ही नहीं होता। [1] मेरी ओर करुण दृष्टि से देखो, सारे दुःख दूर हो जायें। रूपमाधुरी सरस स्वामिनी, आज मेरी बात सुनो.. [2] - श्री रूपमाधुरी जी, श्री रूपमाधुरी जी की वाणी, पदावली (120)