जय राधा, जय राधा

Pitambar Dev Vani — श्री पीताम्बर देव

Verse 2 of 4

(राग ललित ख़्याल) जय राधा, जय राधा, जय राधा जय जय जय राधा। गौरांगी नीलाम्बर भूषित भूषन ज्योति अगाधा॥ [1] सहचरि संगी स्याम धामिनी पुरवनि मन की साधा। श्री रसिक बिहारिनि कृपा निहारनि पीताम्बर आराधा॥ [2] - श्री पीताम्बर देव जी, श्री पीताम्बर देव जू की वाणी (20) (राग ललित ख्याला) जय राधा, जय राधा, जय राधा जय जय जय राधा। गौरांगी नीलांबर भूषित भूषण ज्योति अगाध। [1] कामरेड श्याम धामिनी पुरवानी एक मन के संत हैं। श्री रसिक बिहारिणी कृपा निहारणी पीताम्बर आराध्या.. [2] - श्री पीताम्बर देव जी, श्री पीताम्बर देव जू की वाणी (20)
बिहार है आगार रस कोमो मन ऐसी अटक परी