जय जय राधा-नाम, वृन्दावन जार धाम

Prem Bhakti Chandrika — श्री नरोत्तम दास

Verse 1 of 8

गोविन्द शरीर सत्य ताहार सेवक नित्य, वृन्दावन भूमि तेजोमय। त्रिभुवने शोभासार हेन स्थान नाहिं आर, याहार स्मरणे प्रेम हय॥ - श्री नरोत्तम दास, प्रेम भक्ति चंद्रिका (66) गोविंद तन सत्य भरा, सेवक सदा निवास, वृन्दावन उजियारा भूमि। ऐसा कोई स्थान नहीं जहां त्रिभुवन सुंदर हो, यहां प्रेम स्मरणीय है.. - श्री नरोत्तम दास, प्रेम भक्ति चंद्रिका (66)
जय जय राधा-नाम, वृन्दावन जार धाम