जय जय राधा-नाम, वृन्दावन जार धाम

Prem Bhakti Chandrika — श्री नरोत्तम दास

Verse 8 of 8

युगल चरण सेवा, युगल चरण ध्येवा, युगलेइ मनेर पिरीति। युगल किशोर रूप, काम रतिगण भूप, मनेरहु ओ लीला कि रीति॥ - श्री नरोत्तम दास, प्रेम भक्ति चंद्रिका (43) युगल चरण सेवा, युगल चरण ध्येव, युगलै मनेर पिरिति। युगल किशोर रूप, काम रतिगन भूप, मनेरहु हे लीला की रीति.. - श्री नरोत्तम दास, प्रेम भक्ति चंद्रिका (43)
जय जय राधा-नाम, वृन्दावन जार धाम