जय जय राधा-नाम, वृन्दावन जार धाम
Prem Bhakti Chandrika — श्री नरोत्तम दास
Verse 7 of 8
तार भक्तसंगे सदा, रसलीला-प्रेम कथा, जे करे से पाय घनश्याम।
इहाते विमुख जेई, तार कभु सिद्धि नाई, ना शुनिये तार जेन नाम॥
- श्री नरोत्तम दास, प्रेम भक्ति चंद्रिका (109)
सदैव भक्तों के साथ, रसीली प्रेम कहानी, जैसी चाहो घनश्याम। इहते विमुख जी, तर कभू सिद्धि नै, न शून्य तर जेन नाम.. - श्री नरोत्तम दास, प्रेम भक्ति चंद्रिका (109)