प्रेम फाँस मैं फँसि मरै , सोई जियै सदाहिं

Prem Vatika — श्री रसखान

Verse 28 of 41

प्रेम अगम अनुपम अमित, सागर सरिस बखान। जो आवत यहि ढिग बहुरि, जात नहीं रसखान॥ - श्री रसखान, प्रेम वाटिका (3) प्रेम अगम अनुपम अमित, सागर सरिस बखान। जो आवत ये ढिघ बहुरि, जात नाहिं रसखान.. - श्री रसखान, प्रेम वाटिका (3)
प्रेम फाँस मैं फँसि मरै , सोई जियै सदाहिंप्रेम फाँस मैं फँसि मरै , सोई जियै सदाहिं