प्रेम फाँस मैं फँसि मरै , सोई जियै सदाहिं

Prem Vatika — श्री रसखान

Verse 3 of 41

अति सूछम कोमल अतिहि, अति पतरो अति दूर। प्रेमकठिन सबते सदां, नित इकरस भरपूर॥ - श्री रसखान, प्रेम वाटिका (16) बहुत विचारशील, बहुत नरम, बहुत छोटा, बहुत दूर का। प्रेमकठिन सबते सदन, नित इकारस भारापुर.. - श्री रसखान, प्रेम वाटिका (16)
प्रेम फाँस मैं फँसि मरै , सोई जियै सदाहिंप्रेम फाँस मैं फँसि मरै , सोई जियै सदाहिं