प्रेम फाँस मैं फँसि मरै , सोई जियै सदाहिं

Prem Vatika — श्री रसखान

Verse 4 of 41

भले वृथा करि पचि मरौ, ज्ञान गरूर बढ़ाय। बिना प्रेम फीको सबै, कोटिन कियें उपाय॥ - श्री रसखान, प्रेम वाटिका (9) भले ही आप सभी बेकार चीजों को मार दें, कृपया अपने ज्ञान पर गर्व करें। प्रेम के बिना सब असफल होते हैं, चाहे कितने ही उपाय क्यों न हों... - श्री रसखान, प्रेम वाटिका (9)
प्रेम फाँस मैं फँसि मरै , सोई जियै सदाहिंप्रेम फाँस मैं फँसि मरै , सोई जियै सदाहिं