ऐसौ प्रेम न कहूँ ‘ध्रुव’, है वृंदावन माहिं

Priti Chauvani — श्री ध्रुवदास

Verse 1 of 2

ऐसौ प्रेम न कहूँ ‘ध्रुव’, है वृंदावन माहिं। तिन बिच अंतर निमिष कौ, होत जु कबहूँ नाहिं॥ - श्री ध्रुवदास, प्रीति चौवनी (21) मैं इस प्रेम को 'ध्रुव' नहीं कहता, वृन्दावन तो जननी है। तीनों में अंतर कब प्रकट होता है? - श्री ध्रुवदास, प्रीति चौवानी (21)
ऐसौ प्रेम न कहूँ ‘ध्रुव’, है वृंदावन माहिं