कहूँ लकुट कहुँ मुरलिका पीताम्बर सुधि नाहिं

Priti Lata — श्री ब्रजनिधि

Verse 11 of 11

रस-बस छकि दंपति दुहूँ, कीने बिबिध बिलास। सो सुमरन करि करि बढ़े, हिय में अधिक हुलास॥ - श्री ब्रजनिधि जी, ब्रजनिधि ग्रंथावली, प्रीति लता (55) रस-बस दम्पति को दूध पिलाओ, कैसा बिविद बिलास। अत: जप करके संख्या बढ़ायें, इससे व्यक्ति को अधिक सुख मिलता है.. - श्री ब्रजनिधि जी, ब्रजनिधि ग्रंथावली, प्रीति लता (55)
कहूँ लकुट कहुँ मुरलिका पीताम्बर सुधि नाहिं