कहूँ लकुट कहुँ मुरलिका पीताम्बर सुधि नाहिं
Priti Lata — श्री ब्रजनिधि
Verse 10 of 11
प्यारी के अति प्यार सों, पिय परसत कर पाय।
पीर प्रेम पहचानि कै, छिमा करी मुसुकाय॥
- श्री ब्रजनिधि जी, ब्रजनिधि ग्रंथावली, प्रीति लता (51)
प्रियतम का सबसे प्रिय पुत्र, उससे प्रेम कर सकता है। पीर प्रेम पहचान की, छिमा करि मुस्ककै.. - श्री ब्रजनिधि जी, ब्रजनिधि ग्रंथावली, प्रीति लता (51)