कहूँ लकुट कहुँ मुरलिका पीताम्बर सुधि नाहिं

Priti Lata — श्री ब्रजनिधि

Verse 4 of 11

गौर स्याम सुखदैन हैं, श्री वृंदावन माँझ। जे या रस नहिं जानहीं, तिनकी जननी बाँझ॥ - श्री ब्रजनिधि जी, ब्रजनिधि ग्रंथावली, प्रीति लता (74) गौर श्यामा सुहावने, मध्य श्री वृन्दावन। न कोई आनंद न कोई रस, मेरी माँ तो बांझ है.. -श्री ब्रजनिधि जी,ब्रजनिधि ग्रंथावली,प्रीति लता (74)
कहूँ लकुट कहुँ मुरलिका पीताम्बर सुधि नाहिंकहूँ लकुट कहुँ मुरलिका पीताम्बर सुधि नाहिं