कहूँ लकुट कहुँ मुरलिका पीताम्बर सुधि नाहिं
Priti Lata — श्री ब्रजनिधि
Verse 5 of 11
कहूँ लकुट कहुँ मुरलिका, पीताम्बर सुधि नाहिं।
मोर-चंद्रिका झुकि रही, प्रिया ध्यान मन माहिं॥
- श्री ब्रजनिधि जी, ब्रजनिधि ग्रंथावली, प्रीति लता (63)
लकुट कहो, मुरलिका कहो, लेकिन पीताम्बर को याद नहीं कर सकते। मोरा-चन्द्रिका झुकी रहीं, प्रिया ने मन में ध्यान किया.. - श्री ब्रजनिधि जी, ब्रजनिधि ग्रंथावली, प्रीति लता (63)