वृद्धयर्थात् राधधातोश्व राधा
Radha Nam Sudha — श्री वागीश शास्त्री जी
Verse 6 of 8
वृषभानुसुता राधा- जन्म कोटि शतैरपि।
वांञ्छितापिविर्भवेवेद्यस्य-हृदि धन्यः स मानवः॥
- श्री वागीश शास्त्री जी, श्री राधा नाम सुधा (18)
वृषभानुसुता राधा- कोटि शतैरपि में जन्मीं। वाणीचितपिविरभाववेद्यस्य-हृदय धन्यः स मानवः।।- श्री वागीश शास्त्री जी, श्री राधा नाम सुधा (18)