वृद्धयर्थात् राधधातोश्व राधा

Radha Nam Sudha — श्री वागीश शास्त्री जी

Verse 7 of 8

अन्तरायान् रसास्वादे-दोषान् कामादिकानपि। भक्तानां हन्ति कृपया-तेन राधा प्रकीर्तिता॥ - श्री वागीश शास्त्री जी, श्री राधा नाम सुधा (4) अंतरायण रसस्वदे-दोषं कामदिकानपि। भक्तानाम हन्ति कृपाय-तेन राधा प्रकीर्तिता.. - श्री वागीश शास्त्री जी, श्री राधा नाम सुधा (4)
वृद्धयर्थात् राधधातोश्व राधावृद्धयर्थात् राधधातोश्व राधा