साधन की आस सदाँ
Radha Shataka — श्री लाल बलबीर
Verse 1 of 4
(कवित्त)
अष्ट सिद्धि दायक हैं संतन सहायक हैं,
सृष्टि ही के नायक हैं आनन्द करन हैं। [1]
दरन हैं कलि के कलेसन के जाल हाल,
करत निहाल लीनी आन ये सरन हैं॥ [2]
दास दृग रंजन हैं खलगन गंजन हैं,
कंज लखि हारे लाल कांतिन हरन हैं। [3]
धीरज धरन हारे ऐसे ना निहारे जैसे,
तारन तरन राधा रानी के चरन हैं॥ [4]
- श्री लाल बलबीर, श्री राधा शतक (85)
(कविता) वह अष्ट सिद्धियों का दाता है, वह बच्चों का सहायक है, वह ब्रह्मांड का नायक है, वह खुशी का स्रोत है। [1] दरन जल काली के कालेसन हैं, करत निहाल लिनि अन ये सरन हैं.. [2] दास दृग रंजन हैं खलगन गुंजन हैं, कुंज लखि हरे लाल कंटिन हरन हैं। [3] धीरज धरन हरे, चरणों को ऐसे मत देखो जैसे ये राधा रानी के चरण हैं.. [4] - श्री लाल बलबीर, श्री राधा शतक (85)