आई तुमरे द्वार श्रीवृषभानु कुमारि जू
Radha Shataka — श्री लाल बलबीर
Verse 4 of 4
आई तुमरे द्वार, श्रीवृषभानु कुमारि जू।
चेरी हौं सुकमार, चरन सरन मैं राखीये॥
- श्री लाल बलबीर जी, श्रीराधा शतक (1)
हे तेरे द्वार श्री वृषभानु कुमारी जू। मैं चेरी हूँ, इसे अपने चरणों के नीचे रखो.. - श्री लाल बलबीर जी, श्री राधा शतक (1)