साधन की आस सदाँ
Radha Shataka — श्री लाल बलबीर
Verse 3 of 4
साधन की आस सदाँ सिद्ध ही करन हारे,
अष्ट सिद्ध निद्ध देत रक्षा के करन हैं। [1]
जाके ध्यान धरत सरत जन काज नीके,
जाके त्रास नासे हैं दरिद्र के हरन हैं॥ [2]
दास कहैं करत निहाल ततकाल हाल,
जिनकी सरन लेत रंचिक डर न हैं। [3]
धीरज धरन हारे ऐसे ना निहारे जैसे,
तारन तरन (श्री) राधा रानी के चरन हैं॥ [4]
- श्री लाल बलबीर, श्री राधा शतक (87)
जैसे सदन सिद्ध, हे कारण हरे साधना का कारण है, अष्ट सिद्ध निधि सुरक्षा प्रदान करती है। [1] क्योंकि लोग काम पर ध्यान केंद्रित करते हैं, क्योंकि समस्याएं हैं, वे गरीबों के रक्षक हैं.. [2] दास कहते हैं कि वे तत्काल समाधान वाले लोग हैं, जिनका आशीर्वाद दिलचस्प है। [3] धीरज धरन हरे, चरणों को ऐसे मत देखो मानो वे (श्री) राधा रानी के तैरते हुए चरण हों.. [4] - श्री लाल बलबीर, श्री राधा शतक (87)